मतलब, हैवानियत।

Avishek Sahu
August 27, 2018

मतलब कभी ढूंडा था मैंने यूहीं कांटों के रस्तों पे चलते चलते,

नाक में दम कर रखा था ये दिल ज़ख्मों पे नमक मलते मलते,

बोला यूहीं नहीं मिल गया तुझे सुकून उन नटखट रातों की बातों में,

और यूहीं नहीं बच गया था तू उन बातों से भरी मुलाकातों में।

अब इतना ना बौखलाते जा तू भीख के सरहदों पे रेंगते हुए,

इतना भी होता अक्कड़ तो घरवालों को … Read the rest

किस्सा चमार का।

Avishek Sahu
August 26, 2018

भड़वे से ना पूछो पैसे कैसे लौटाई जाते हैं,

चमार से ना पूछो अच्छे वाले सस्ते जूते कहां से आते हैं,

आते हैं तो आते हैं किस्मत वालों को आते हैं,

इसमें ना सर खपाओ जब करम के पुजारी सताते हैं,

क्यूंकि भड़वा पैसा लौटा दिया तो जब वाट उसकी लगती है,

तो सस्ते जूते वालों को पता चलता है बीवी क्यूं उन्पे हगती है,

इसी लिए दोस्तों भड़वे से … Read the rest

आओ कतले आम करें।

Avishek Sahu
August 23, 2018

इतनी भी क्या बात बड़ी है मंदिर को तुड़वाना,

मंदिर तो टूटती अाई है, मुश्किल है भूलवाना,

अब राम ही है कोई रहीम तो नहीं जो घर की मांग करे

घर ही तो है अब घर ही रखलो आओ कतले आम करें

घर भी तो है वो उसीका जो कतले आम करे

अरे करे तो करे क्या आम है उसमे जो उसे बदनाम करे

बदनामी की हो तुमको जरुरत तो … Read the rest

ब्लेड है तकदीर नहीं।

Avishek Sahu
August 23, 2018

ब्लेड है तकदीर नहीं जो हाथ से फिसल जाए,

पकड़ो उस गुणवान धनी को जो तकदीर मसल आए,

अरे तकदीर बनी थी पिस्तौल की छबि, फट से अंदर तक हो आए,

अब इसमें क्या संकोच है इतनी, के गुणवान अंदर ना हो आए,

अब अंदर की बात बस अंदर की नहीं है, ये तो बात है अंदरूनी की,

जो यूहीं बस झट से नाच उठे, जब जान हो बन आने … Read the rest

इस मिट्टी के संग।

Avishek Sahu
August 23, 2018

सुना है कुछ लोग मज़ाक नहीं सेह सकते,

एक छोटे से बच्चे को सुला नहीं सकते,

बरसते हैं वो सब बस दिखाने के लिए,

के बाकी तो बने हैं सिर्फ हड़काने के लिए,

तभी तो जाओगे इस मिट्टी के संग,

जहां कोई ना जाए फेंकने दो रंग,

अब रंग ही तो हम बस फेंक आए हैं,

वरना क्यूं उस मुश्किल में फस आए हैं,

वैसी होगी अगर कहीं पे किसी … Read the rest

उन दिनों की बात?

Avishek Sahu
August 22, 2018

पिस्तौल है कोई फर्श नहीं है पैरों के नीचे आती नहीं,

आती भी अगर पैरों के नीचे झाड़ू से पुछवाती नहीं,

झाड़ू आखिर तो है किसिका दिल का नज़राना,

इतना ना इतराओ के जाके भरना हो जुर्माना,

पाप आखिर किए हो तुम तो धरती को बचाके,

इसकी तो धाजिया उड़ गई थी गंध मचाके,

अब ऐसी भी क्या खुंदस है तुम्हारी के पिस्तौल ठिकाने लगा रहे हो,

अरे एक बार … Read the rest

ईद मुबारक।

Avishek Sahu
August 22, 2018

ईद है कोई जश्न नहीं है, ध्यान से, इतना चहको मत,

आओ ज़रा खीर चख ले, अरे दोस्तों से, इतना बहको मत,

खुद बना दे अगर ईद का खीर, तो फिर सरहद पार तो जाना पड़ेगा,

और उन बुज़दिल जुल्मियों को गले से लगाना पड़ेगा,

अरे गले लगाना है तो लगा लेंगे लगाने में इतनी क्या मजबूरी है,

लगाने ही तो बचाए हुए हैं वरना दंगो में क्या कमज़ोरी है,… Read the rest

हथौड़ा सुपारी का।

Avishek Sahu
August 22, 2018

हथौड़े से कभी इश्क करो तो जुर्माना तयार रखना,

अब हथौड़ा है हथौड़े के खातिर काफी धूल तो होगा चखना,

धूल है कोई राख नहीं जिसको हम नियम से टटोलेंगे,

ये तो बस जुनून है जिसकी लाज हम रखेंगे,

फिर भी अगर हुई मुशक्कत बकरी नहलाने में,

राम कसम खो जाओगे आप तो दिल बहलाने में,

आखिर दिल दिया कोई जान नहीं दी जो दिमाग से डरेंगे,

हम तो बस … Read the rest

सुट्टे की बीज से।

Avishek Sahu
August 22, 2018

सुट्टे की बीज से कभी तन्दरूस्ती निकालो तो पता चलेगा तन्दरूस्ती तो बीमारी है,

जिस बीमारी के चलते सैकड़ों लोग उस फरिश्ते के आभारी हैं,

जिस फरिश्ते ने सिखाया बंदूक तो एक छोटी सी ख्वाहिश है,

ख्वाहिश है पर बस ख्वाहिश नहीं ज़र्रे ज़र्रे की नुमाइश है

जिस नुमाइश के आगे चलाने वाले हर रोज़ झुकते हैं

अब झुकते हैं तो झुकते हैं इससे जंग थोड़ी ना रुकते हैं

इसी … Read the rest

उन फरिश्तों के आड़ में।

Avishek Sahu
August 21, 2018

कर गए थे सब कुछ जो फरिश्तों के आड़ में,

तबाह हो गई थी बहुत कुछ जो बिखरे रिश्तों की बाड़ में,

है तो ये बस सबक इस बरसती हुई संसार का

जहां बदलते हैं मौसम पतझड़ के प्रचार का

तो क्या रखा है बोलो उन भूली बिखरी सी कतलों में

जिनका ज़ायका हमें मिलती रही इन ज़ालिम सी फसलों में,

गर्मी पैदा जो करदे यूहीं तवे पे पकते हुए,… Read the rest