ठडकी में बादशाही हो या बादशाही में ठडकी

Avishek Sahu
June 26, 2019

गिरेबान में तो हमने भी झाँका मगर मारे गए आराम से,

आखिर है तो ये वही माजला जब सब  बिक गए हो हराम से,

अब दो चार सुट्टा यहीं मार लो वर्ना सोचेंगे सब है ये नन्हा सा,

घुस गया तो गुज़र जायेगी बदन की ख़ुशी कोई बीता लम्हा सा,

हाँ हसीन तो भड़वा ज़िन्दगी जियेगा हम सब जो रखे हैं संभाल के, 

इस युग की सबसे तीखी बिजलियाँ जो कलियाँ बन गई जंजाल के,

अरे छोड़ो तुम अब हाथ ना लगाओ हम समझ गए सीटी कुत्तों की,

जाओ अब ले आओ फरमान मद्रासों की या कलकतों की,

बस कड़की आए तो याद रखना हमें पसंद नहीं कड़की किताबों सा 

चाहे ठडकी में बादशाही हो या बादशाही में ठडकी गुलाबों सा 

 

चलो फुदको अब सभी बहनचोदों हम तो आ गए हैं जापान से,

अब बताओ वहां भी साला कोई ले ना पाया जब निकले थे हम कूड़ेदान से,

जूते भी सब फट गए समझो चाहे वो इटली का हो या कब्रस्तान का,

बस ख्वाब रह गए फिर भी नशीली उन बंदूकों का और उस गुलिस्तान का,

जी कुत्ते हैं तो क्या हुआ नीयत तो लाए हैं सब यासीन सा,

बदन तो कम्बख्त कोमल रखा है अरे माधुरी नहीं बिलकुल शाहरुख़ सा,

इसकी तो दो चार सुई लगवा दें बस बचा ले अगर कोई बीहड़ से,

बोलते ऐसी ताज़गी तो हिरन में भी ना देखी जैसी आए तुम्हारे चुत्तड़ से,

बस कड़की आए तो याद रखना हमें पसंद नहीं कड़की किताबों सा 

चाहे ठडकी में बादशाही हो या बादशाही में ठडकी गुलाबों सा