घासलेट के प्रेम में

Viper Inc.
December 20, 2018

मेरे अरमान सब जल के राख हो गए, घासलेट के प्रेम में,

अब बताओ अरमानों का भला क्या काम, इस मुश्किल भरी ट्रैन में,

ट्रैन में न जाने कैसे कैसे मिल जाते हैं ज़ख्म पे नमक छिड़काने को,

थोड़ा साइड दे ज़ालिम हवा नहीं आ रही, मेरी दुर्दशा का नस नस तड़पाने को,

 

अब इतनी सी तो ख़्वाहिश थी हमारी, जंग पे निकलने से पहले,

के प्यार का दो घूँट सुकून से चख लेते, उस प्यार को समझने से पहले,

साली एक आद बार ही तो आ जाती है मुश्किल में रेंगते हुए,

उस मुश्किल में उनका होंठ चख लेते, क्या जाता तेरा जाते हुए,

 

कभी उनसे पूछना आखिर क्या बात थी की उन्होंने प्यार से इनकार कर दिया,

हमने भी दिल चीर के दिखाया था, उनका प्यार हि वो था जिसने हमें खूंखार कर दिया,

वरना हम तो ठेहरे प्रभु की अर्चन में दिन रात किताबों में नसीब टटोलने वाले,

और उस नसीब में आपको नाटकीय मोड़ दे के अपने आप से अपनी बेइज़्ज़ती करवाने वाले,

 

आना कभी मालकिन पतली गली से ये देखने हम ने जंग में क्या क्या सीखा है,

है तो हम अभी भी नन्ही सी शकल रखने वाले फिर भी जान थोड़ा बहुत तीखा है,

तीखेपन से आप में थोड़ा सा और, और थोड़ा और, ना  मिटने वाली प्यास जगा दे,

फिर प्रभु को बोलेंगे हमने भी आज पूजा किया है, बस हमारी भी ज़रा नौकरी लगा दे।