गर्मी ही कुदरत है

Viper Inc.
December 17, 2018

सावन से पूछोगे तो पता चलेगा गर्मी तो आदमी की फितरत है,

अब आदमी फितरत छिपा ले इसका ये मतलब नहीं के फितरत ही कुदरत है,

कुदरत छुपाने तो न जाने आज कल दुनिया वाले क्या क्या नहीं करते,

बोलते हैं गर्मी तो पैदा करती दुर्बुद्धि, जो आज कल किताबों से भी उभरते,

ऐसा भी क्या शासन के बच्चों को बोलते हो किताबें ढंग की चुनो,

अजी हम बोले ढंग के किताबों में भी झट से तुम कूट विचार ही बुनो,

ऐसी किताबें तो लिखी होती है, जवानी आज़माने के लिए डिग्री हासिल करवा दे,

और डिग्री के बल पे मिली हुई प्यार के हाथों तुम्हारी बढ़प्पन आजीवन मरवा दे,

इस से तो अच्छा होता तुम गंदी पिक्चरें देख के अपना दिल बेहला लेते,

लड़की की भेस में उसका मामा न देख पाए, अपनी अकल तो थोड़ी सेहला लेते,

अब जाओ जाके जुरमाना भरो उन गन्दी होटलों के आँगन में,

जहाँ जवानी आज़मा रहे थे तुम प्रेम के पाक बंधन में,

बंधन तो गई अब तेल लेने बॉस को तो तुमसे नफरत है,

अब कल से ही बीवी को काम पे लगा लो, क्या करें, गर्मी ही कुदरत है।