आओ कतले आम करें।

Avishek Sahu
August 23, 2018

इतनी भी क्या बात बड़ी है मंदिर को तुड़वाना,

मंदिर तो टूटती अाई है, मुश्किल है भूलवाना,

अब राम ही है कोई रहीम तो नहीं जो घर की मांग करे

घर ही तो है अब घर ही रखलो आओ कतले आम करें

घर भी तो है वो उसीका जो कतले आम करे

अरे करे तो करे क्या आम है उसमे जो उसे बदनाम करे

बदनामी की हो तुमको जरुरत तो जाओ कतले आम करो

जाओ उसे बेघर करलो तुम वरना झट से डूब मरो

बेघर होकर जब काट खाएगा अपनी खुद जल्दी से,

आके इधर तुम मत फिर बोलना बचालो हमें जल्दी से,

अरे बचाने ही तो कमबख्त आए थे लेके वो नज़राना,

अब नज़राना है नज़राना ही समझो जो है कोई परवाना,

अब शम्मे की गर हुस्न को देखकर कोई नज़राना बेघर करे,

आना तुम पतली गली से जहां हर कोई कीचड़ भरे,

उन बेतुकी सी बेरुखी सी गुज़रे दिनों की यादों में,

जब कतले बस आम किए थे उन घरवालों के वादों ने।

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