गुरु बेशर्मी में, भाई बेरहमी में

Avishek Sahu
January 23, 2019

कब से बैठे हैं उस धुन की राह में, जिस धुन की गूँज कभी बचपन में आती थी,

ऐसे ही बागीचे में टहलते टहलते मंदिर को जहाँ भेंट अर्चन की जाती थी,

जिस अर्चन के किस्से सुन कर कभी कोई इस तरफ टहलने आया था,

जब ऐसे ही इधर उधर कुछ घटायें छाई थी और किसी ने उसका मज़ाक उड़ाया था,

 

की है तो वो सूअर उन कमसिन पतली … Read the rest

घासलेट के प्रेम में

Avishek Sahu
December 20, 2018

मेरे अरमान सब जल के राख हो गए, घासलेट के प्रेम में,

अब बताओ अरमानों का भला क्या काम, इस मुश्किल भरी ट्रैन में,

ट्रैन में न जाने कैसे कैसे मिल जाते हैं ज़ख्म पे नमक छिड़काने को,

थोड़ा साइड दे ज़ालिम हवा नहीं आ रही, मेरी दुर्दशा का नस नस तड़पाने को,

 

अब इतनी सी तो ख़्वाहिश थी हमारी, जंग पे निकलने से पहले,

के प्यार का दो … Read the rest

गर्मी ही कुदरत है

Avishek Sahu
December 17, 2018

सावन से पूछोगे तो पता चलेगा गर्मी तो आदमी की फितरत है,

अब आदमी फितरत छिपा ले इसका ये मतलब नहीं के फितरत ही कुदरत है,

कुदरत छुपाने तो न जाने आज कल दुनिया वाले क्या क्या नहीं करते,

बोलते हैं गर्मी तो पैदा करती दुर्बुद्धि, जो आज कल किताबों से भी उभरते,

ऐसा भी क्या शासन के बच्चों को बोलते हो किताबें ढंग की चुनो,

अजी हम बोले ढंग … Read the rest

हम नहीं तुम कहलाते बाज़ीगर

Avishek Sahu
December 17, 2018

इतनी धुप कभी हुई नहीं थी जितनी आज हमने बागानों में देखी,

हाँ ये बात और है की जिस दिन देखी उस दिन किसी ने घर में रोटी नहीं सेकी ,

क्यों के रोटी तो सेकाई जाती है खाने वालों के भूक मिटाने,

पर हम तो आ गए थे खाने वाले के नाम से अपनी बची कुची इज़्ज़त लुटाने,

लुटाने इस लिए आ गए थे क्यों की जिसकी इज़्ज़त नहीं … Read the rest

लुत्फ़ मदारी का

Avishek Sahu
December 11, 2018

सज़ा तो हमें तब सुनाई दी थी जब हम अपनी इज़्ज़त बचा रहे थे,

अब ये कैसी सज़ा थी जो इज़्ज़त बचाने वाले को मज़ा चखा रहे थे,

अबे बकचोदी करना है तो ऐसे करो के सामने वाले भी बकचोद बनना चाहे

ये क्या बात हुई के आप के ख़ौफ़ से, बादशाह भी प्रतिशोद करना चाहे

अब बादशाह हैं बादशाही के खातिर हिसाब तो रखना पड़ेगा,

इतनी अगर हज़म न … Read the rest

असर आयोडेक्स का

Avishek Sahu
December 4, 2018

ज़ख्म तो जनाब बहुत होते हैं, कभी प्यार का ज़ख्म खुरेद के देखो,

पता चलेगा निकले थे हम मल्हम लगाने, छोरियां बोली पहले अपना पिछवाड़ा सेको

इतने में तस्सली मिल गयी के इस दुनिया में मल्हम तो बिकती है तवायफ की,

जो खूब नाच के दिल बेहला ले कसम उन आग उगलती फव्वारों की

तवायफ बोले ये तो सब दिखावा है एकदम बीच बाज़ारों की नफरत का,

नफरत जो झट … Read the rest

फ़िल्टर वाली देना।

Avishek Sahu
December 3, 2018

कीचड़ की तो हमें आदत सी पड़ गयी जबसे प्यार हुआ इस दिल को,

अब प्यार है हो जाता है जब चुहिया पैसा लेके भागे अपने बिल को,

ये बिल जो है बड़ा विचित्र सा है, जो चुहिया बनाई बड़े प्यार से,

भूल के भी इसमें कदम न रखना, ये खुलती नहीं हथ्यार से,

इसमें तो बस थोड़ा सा तुम घासलेट छिड़क के डाल देना,

चुहिया बोलेगी घासलेट से डर … Read the rest

किराए की भड़ास

Avishek Sahu
December 2, 2018

इतना न तू मिल मुझे यूँ तेरी ज़बान की छूटी लगाम दिखाते हुए

लगाम की ज़ोर तो तब ही नाप लीया जब शादी में आया में सीना ठोकते हुए,

अब शादी तो यार आज कल सब की हो जाती है, इसमें बड़ा क्या है मानना

कानून तो अप्पकी पुरानी सी रखैल है, ये मुश्किल न था हमें जानना,

तभी तो जब भी आप को देखा, मूँह में से यूँ हस्सी … Read the rest

Terror and Talks Have to go Together!

Avishek Sahu
November 29, 2018

This is why I love Pakistan: it has kept the legacies of the likes of Sardar Bhagat Singh alive! Yes, the real damage during the independence movement was done by the bad boys. Subhash Bose, Chandrashekhar Azaad, Rajguru, and so many unsung heroes of the movement that resorted to violence were the ones who turned the tables on The British; and Gandhi took credit for all of that. That’s why … Read the rest

बिकी हुई फुलझड़ी

Avishek Sahu
November 22, 2018

बुज़दिलों को पूछो इतनी सर्दी में सर कहाँ छिपाई जाती है

पता लगेगा इन दिनों तो दोस्तों यहाँ पागलपन सिखाई जाती है

अजी सर्दी जो है ये उस तरीके की जो तरीका कोई सालों पहले आज़माया करता था

लिपट गयी फिर आग में जो झुलस के कल कम्बख्त नौकरी फरमाया करता था

अब नौकरी ही है नौकरी की खातिर हमने तो पापड़ बेलने से कभी ना नहीं कही

फिर भी … Read the rest

Checkmate!?

Avishek Sahu
October 23, 2018

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मतलब, हैवानियत।

Avishek Sahu
August 27, 2018

मतलब कभी ढूंडा था मैंने यूहीं कांटों के रस्तों पे चलते चलते,

नाक में दम कर रखा था ये दिल ज़ख्मों पे नमक मलते मलते,

बोला यूहीं नहीं मिल गया तुझे सुकून उन नटखट रातों की बातों में,

और यूहीं नहीं बच गया था तू उन बातों से भरी मुलाकातों में।

अब इतना ना बौखलाते जा तू भीख के सरहदों पे रेंगते हुए,

इतना भी होती अक्कड़ तो घरवालों को … Read the rest

किस्सा चमार का।

Avishek Sahu
August 26, 2018

भड़वे से ना पूछो पैसे कैसे लौटाई जाते हैं,

चमार से ना पूछो अच्छे वाले सस्ते जूते कहां से आते हैं,

आते हैं तो आते हैं किस्मत वालों को आते हैं,

इसमें ना सर खपाओ जब करम के पुजारी सताते हैं,

क्यूंकि भड़वा पैसा लौटा दिया तो जब वाट उसकी लगती है,

तो सस्ते जूते वालों को पता चलता है बीवी क्यूं उन्पे हगती है,

इसी लिए दोस्तों भड़वे से … Read the rest

आओ कतले आम करें।

Avishek Sahu
August 23, 2018

इतनी भी क्या बात बड़ी है मंदिर को तुड़वाना,

मंदिर तो टूटती अाई है, मुश्किल है भूलवाना,

अब राम ही है कोई रहीम तो नहीं जो घर की मांग करे

घर ही तो है अब घर ही रखलो आओ कतले आम करें

घर भी तो है वो उसीका जो कतले आम करे

अरे करे तो करे क्या आम है उसमे जो उसे बदनाम करे

बदनामी की हो तुमको जरुरत तो … Read the rest

ब्लेड है तकदीर नहीं।

Avishek Sahu
August 23, 2018

ब्लेड है तकदीर नहीं जो हाथ से फिसल जाए,

पकड़ो उस गुणवान धनी को जो तकदीर मसल आए,

अरे तकदीर बनी थी पिस्तौल की छबि, फट से अंदर तक हो आए,

अब इसमें क्या संकोच है इतनी, के गुणवान अंदर ना हो आए,

अब अंदर की बात बस अंदर की नहीं है, ये तो बात है अंदरूनी की,

जो यूहीं बस झट से नाच उठे, जब जान हो बन आने … Read the rest

इस मिट्टी के संग।

Avishek Sahu
August 23, 2018

सुना है कुछ लोग मज़ाक नहीं सेह सकते,

एक छोटे से बच्चे को सुला नहीं सकते,

बरसते हैं वो सब बस दिखाने के लिए,

के बाकी तो बने हैं सिर्फ हड़काने के लिए,

तभी तो जाओगे इस मिट्टी के संग,

जहां कोई ना जाए फेंकने दो रंग,

अब रंग ही तो हम बस फेंक आए हैं,

वरना क्यूं उस मुश्किल में फस आए हैं,

वैसी होगी अगर कहीं पे किसी … Read the rest

उन दिनों की बात?

Avishek Sahu
August 22, 2018

पिस्तौल है कोई फर्श नहीं है पैरों के नीचे आती नहीं,

आती भी अगर पैरों के नीचे झाड़ू से पुछवाती नहीं,

झाड़ू आखिर तो है किसिका दिल का नज़राना,

इतना ना इतराओ के जाके भरना हो जुर्माना,

पाप आखिर किए हो तुम तो धरती को बचाके,

इसकी तो धाजिया उड़ गई थी गंध मचाके,

अब ऐसी भी क्या खुंदस है तुम्हारी के पिस्तौल ठिकाने लगा रहे हो,

अरे एक बार … Read the rest

ईद मुबारक।

Avishek Sahu
August 22, 2018

ईद है कोई जश्न नहीं है, ध्यान से, इतना चहको मत,

आओ ज़रा खीर चख ले, अरे दोस्तों से, इतना बहको मत,

खुद बना दे अगर ईद का खीर, तो फिर सरहद पार तो जाना पड़ेगा,

और उन बुज़दिल जुल्मियों को गले से लगाना पड़ेगा,

अरे गले लगाना है तो लगा लेंगे लगाने में इतनी क्या मजबूरी है,

लगाने ही तो बचाए हुए हैं वरना दंगो में क्या कमज़ोरी है,… Read the rest

हथौड़ा सुपारी का।

Avishek Sahu
August 22, 2018

हथौड़े से कभी इश्क करो तो जुर्माना तयार रखना,

अब हथौड़ा है हथौड़े के खातिर काफी धूल तो होगा चखना,

धूल है कोई राख नहीं जिसको हम नियम से टटोलेंगे,

ये तो बस जुनून है जिसकी लाज हम रखेंगे,

फिर भी अगर हुई मुशक्कत बकरी नहलाने में,

राम कसम खो जाओगे आप तो दिल बहलाने में,

आखिर दिल दिया कोई जान नहीं दी जो दिमाग से डरेंगे,

हम तो बस … Read the rest

सुट्टे के बीज से।

Avishek Sahu
August 22, 2018

सुट्टे के बीज से कभी तन्दरूस्ती निकालो तो पता चलेगा तन्दरूस्ती तो एक बीमारी है,

जिस बीमारी के चलते सैकड़ों लोग उस फरिश्ते के आभारी हैं,

जिस फरिश्ते ने सिखाया बंदूक तो एक छोटी सी ख्वाहिश है,

ख्वाहिश है पर बस ख्वाहिश नहीं ज़र्रे ज़र्रे की नुमाइश है

जिस नुमाइश के आगे चलाने वाले हर रोज़ झुकते हैं

अब झुकते हैं तो झुकते हैं इससे जंग थोड़ी ना रुकते हैं… Read the rest

उन फरिश्तों के आड़ में।

Avishek Sahu
August 21, 2018

कर गए थे सब कुछ जो फरिश्तों के आड़ में,

तबाह हो गई थी बहुत कुछ जो बिखरे रिश्तों की बाड़ में,

है तो ये बस सबक इस बरसती हुई संसार का

जहां बदलते हैं मौसम पतझड़ के प्रचार का

तो क्या रखा है बोलो उन भूली बिखरी सी कतलों में

जिनका ज़ायका हमें मिलती रही इन ज़ालिम सी फसलों में,

गर्मी पैदा जो करदे यूहीं तवे पे पकते हुए,… Read the rest

We Ain’t No Nice Guys After All!

Avishek Sahu
May 25, 2018

Respect we don’t crave, it’s what you insist we take
So you could tolerate us more, with all the noise we make
Noise comes easy, we’ve seen the world go down on its knees
God forbid silence, or we’re destined to live like bees
Hunted from the beginning, honey we don’t make for you
We make it so you could have it, and not stink like only you can really … Read the rest

Come on Bas!-ards, Let’s Do Business!

Avishek Sahu
May 11, 2018

The Market is insecure; because the Market knows it doesn’t have the wherewithal to be King. The market understands that the right product could have it in a bind of a kind that keeps a perpetual leash on the mind: so it plots, conspires, and sabotages, to the extent that it can have some reason to remain King, and unjustly so. The fear is not the insult of having to … Read the rest

About Islam, From a Logical and Observational Point of View!

Avishek Sahu
April 30, 2018

Muhammad is not Islam; Islam is Muhammad; Muhammad is greater than Islam, and the reason for style and glamor in the world. If Shiva gave us tehzeeb, Muhammad took that tehzeeb and gave us a heady concoction of style and tehzeeb. If the world today wallows in Fashion, Music, and Entertainment inspite of the serious conservatism in Christianity and other world religions, it’s because Muhammad stipulated the celebration of the … Read the rest

Why Brian Lara is The Best Batsman in The World, Ever!

Avishek Sahu
April 28, 2018

Now this is a recreational analysis from a relative layman’s point of view and should be taken with a pinch of salt. This is written with due and adequate respect to some of the greats of our world. No disrespect whatsoever is intended towards anybody mentioned herewith:

Why Brian Lara is the best batsman in the world.

Now to judge the strength of a batsman, if you need one yardstick, … Read the rest